सोमवार, 10 सितंबर 2018

586. चाँद रोज़ जलता है

चाँद रोज़ जलता है   

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तूने ज़ख़्म दिया तूने कूरेदा है   
अब मत कहना क़हर कैसा दिखता है।   

राख में चिंगारी तूने ही दबाई   
अब देख तेरा घर खुद कैसे जलता है।   

तू हँसता है करके बरबादी गैरों की   
गुनाह का हिसाब खुदा रखता है।   

पैसे के परों से तू कब तक उड़ेगा   
तेज़ बारिशों में काग़ज़ कब टिकता है।   

तू न माने 'शब' के दिल को सूरज जाने   
उसके कहे से चाँद रोज़ जलता है।   

- जेन्नी शबनम (10. 9. 2018)   

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