Friday, January 20, 2012

मदिरा का नशा...

मदिरा का नशा...

*******

तुमने तो जाना है
मदिरा नशा है
नशा जो जीवन छीन लेता है
मदिरा जो मतवाला बना देती है,
मदिरा का नशा
तुम क्या जानो दोस्त
घूँट-घूँट पीकर
जब मचलती है ज़िंदगी
यूँ मानो
हमने जीवन को पिया है
पल पल को जिया है,
सिगरेट के छल्लो में
जब उड़ती है ज़िन्दगी
मेरे दोस्त
क्या तुमने देखी है उसमें
ज़िन्दगी की तस्वीर,
कश-कश पीकर
जब चहकती है ज़िन्दगी
यूँ मानो
हमने जीत ली तकदीर
बदल डाली हाथों की लकीर,
पर
मदिरा का नशा
जब उतरता है
धुंआ धुंआ सांसें
उखड़ी उखड़ी चाल
कमबख्त बस बदन टूटता है
मगज कब कहाँ कुछ भूलता है,
मदिरा के नशे ने
पल पल होश दिलाया है
जालिम ज़िन्दगी ने
जब जब तड़पाया है
कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !

- जेन्नी शबनम (जनवरी 15, 2012)

________________________________________