Saturday, December 31, 2011

बीत गया...

बीत गया...

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तय मौसम का एक मौसम
अच्छा हुआ बीत गया
हार का एक मनका
अच्छा हुआ टूट गया !
समय का मौसम
मन का मनका
साथ-साथ बिलख पड़े
आस का पंछी रूठ गया !
दोपहरी जलाती रही
सांझ कभी आती नहीं
ये भी किस्सा खूब रहा
तमाशबीन मेरा मन रहा !
हर कथा का सार वही
जीवन का आधार वही
वक़्त से रंज क्यों
फ़लसफ़ा मेरा कह रहा !

- जेन्नी शबनम (दिसम्बर 31, 2011)

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