सोमवार, 22 अगस्त 2011

274. दुनिया बहुत रुलाती है...

दुनिया बहुत रुलाती है...

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प्रेम की चाहत कभी कम नहीं होती
ज़िन्दगी बस दुनियादारी में कटती है,
कमबख्त ये दुनिया बहुत रुलाती है.

_ जेन्नी शबनम (21. 8. 2011 )

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