Friday, July 25, 2014

463. फ़ना हो जाऊँ...

फ़ना हो जाऊँ...

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मन चाहे बस सो जाऊँ  
तेरे सपनों में खो जाऊँ !  

सब तो छोड़ गए हैं तुमको   
पर मैं कैसे बोलो जाऊँ !  

बड़ों के दुख में दुनिया रोती  
दुःख अपना तन्हा रो जाऊँ !  

फूल उगाते गैर की खातिर  
ख़ुद के लिए काँटे बो जाऊँ !  

ताउम्र मोहब्बत की खेती की   
कैसे ज़हर मैं अब बो जाऊँ !  

मिला न कोई इधर अपना तो  
'शब' सोचे कि फ़ना हो जाऊँ !  

- जेन्नी शबनम (25. 7. 2014)  

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