Thursday, January 6, 2011

नए साल में मेरा चाँद...

नए साल में मेरा चाँद...

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चाँद के दीदार को
हम तरस गए,
अल्लाह...
अमावास का अंत
क्यों होता नहीं?
मुमकिन है
नया साल
चाँद से
रूबरू करा जाए...

__ जेन्नी शबनम __ १. १. २०११

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