शनिवार, 4 अप्रैल 2020

653. शाम

शाम  

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ऐसी कोई शाम हो  
जब थका हारा जीवन  
अपने अंत पर हो  
एक बड़ा चमत्कार हो जाए  
ढ़लता सूरज सब जान जाए  
भेज दे वो अपने रथ से थोड़ा सुकून
और हर ले उदासी  
भले ही वह पल शाम हो  
पर जीवन की सुबह बन जाए  
शाम से रात तक  
जीवन को अर्थ मिल जाए  
काश ऐसी कोई शाम हो  
ढ़लता सूरज देवता बन जाए।

- जेन्नी शबनम (4. 4. 2020)  

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