सोमवार, 8 अक्तूबर 2018

589. अनुभूतियाँ

अनुभूतियाँ   

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कुछ अनुभूतियाँ   
आकाश के माथे का चुम्बन है   
कुछ अनुभूतियाँ   
सूरज की ऊर्जा का आलिंगन है   
हर चाहना हर कामना   
अद्भूत अनोखा अँसुवन है   
न क्षीण न स्थाई कुछ   
मगर ये भाव   
सहज अनोखा बन्धन है।   

- जेन्नी शबनम (8. 10. 2018)   

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