मंगलवार, 16 जून 2020

673. ख़ाली हाथ जाना है

ख़ाली हाथ जाना है 

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ख़ाली हाथ हम आए थे   
ख़ाली हाथ ही जाना है !  

तन्हा-तन्हा रातें गुज़री   
तन्हा दिन भी बिताना है !  

समझ-समझ के समझे क्यों   
समझ से दिल कब माना है !  

कतरा-कतरा जीवन छूटा   
कतरा-कतरा सब पाना है !  

बूँद-बूँद बिखरा लहू   
बूँद-बूँद मिट आना है !  

झम-झम बरसी आँखें उसकी   
झम-झम जल ये चखाना है !  

'शब' को याद मत करो तुम   
उसका गया जमाना है !  

- जेन्नी शबनम (16. 6. 2020)
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