शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

209. दस्तावेज़...

दस्तावेज़...

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ज़िन्दगी एहसासों का दस्तावेज़ है,
पल-पल हर्फ़ में पिरो दिया,
शायद कभी कोई पढ़े मुझे भी !

- जेन्नी शबनम (26. 1. 2011)

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