Sunday, October 20, 2013

421. ज़िन्दगी (21 हाइकु)

ज़िन्दगी (21 हाइकु)

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1.
लम्हों की लड़ी
एक-एक यूँ जुड़ी
ज़िन्दगी ढली ।

2.
गुज़र गई
जैसे साज़िश कोई
तमाम उम्र ।

3.
ताकती रही
जी गया कोई और
ज़िन्दगी मेरी ।

4.
बिना बताए
जाने किधर गई
मेरी ज़िन्दगी ।

5.
फैला सन्नाटा
ज़मीं से नभ तक
ज़िन्दगी कहाँ ।

6.
कैसी पहेली
ज़िन्दगी हुई अवाक्
अनसुलझी ।

7.
उलझी हुई 
है अजब पहेली
मूर्ख ज़िन्दगी 

8.
ज़िन्दगी बीती
जैसे शोर मचाती
आँधी गुज़री ।

9.
शोर मचाती
बावरी ये ज़िन्दगी 
भागती रही ।

10.
खींचती रही
अन्तिम लक्ष्य तक
ज़िन्दगी-रथ ।

11.
रिसता लहू
चाक-चाक ज़िन्दगी 
चुपचाप मैं ।

12.
नहीं खिलती
ज़िन्दगी की बगिया
रेगिस्तान मैं ।

13.
तड़प-तड़प के
ज़िन्दगी यूँ गुज़री
जल-बिन मछली ।

14.
रौशन होती
ग़ैरों की चमक से
हाय ज़िन्दगी ।

15.
तमाम उम्र
भरमाती ही रही
ज़िन्दगी छल ।

16.
मौन ही रहो
ज़िन्दगी चुप रहो
ज्यों सूरज है ।

17.
ज़िन्दगी ढली
मगर चुपचाप
ज्यों रात ढली ।

18.
सूरज ढला
ज़िन्दगी भी गुज़री
सब ख़ामोश ।

19.
अब भी शेष
देहरी पर मन
स्वाहा ज़िन्दगी ।

20.
मेरी ज़िन्दगी 
कहानी बन गई
सबने कही ।

21.
हवन हुई
बादलों तक गई
ज़िन्दगी धुँआ ।

- जेन्नी शबनम (10. 10. 2013)

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