Wednesday, June 15, 2011

वो दोषी है...

वो दोषी है...

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कच्ची उम्र
कच्ची सड़क पर
अपनी समस्त पूँजी
घसीट रही
उसे जाना है सीमा के पार
अकेले रहने
क्योंकि
वो पापी है
वो दोषी है !
छुपा रही लूटा धन
लपेट रही अपना बदन
शब्द-वाणों से है छलनी मन
नरभक्षियों ने किया घायल तन
सगे-संबंधी विवश
मूक ताक रहे सभी निस्तब्ध !
नोच खाया जिसने
उसी ने ठराया दोषी उसे
अब न मिलेगी छाँव
भले कितने ही थके हों पाँव
कोई नहीं है साथ
जिसे कहे मन की बात
हार गई स्वयं अपने से
झुकी आँखें शर्म से !

- जेन्नी शबनम (14. 6. 2011)

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