Tuesday, July 27, 2010

159. शापित हूँ मैं... / shaapit hun main...

शापित हूँ मैं...

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शापित हूँ मैं...
सिर्फ खोना है
हारने के लिए जीना है !

अवांछित हूँ मैं...
सिर्फ क्रंदन है
एहसास है पर बंधन है !

नियति का मज़ाक हूँ मैं...
ठूंठ बदन है
पर फूल खिल गये हैं !

नहीं उगने दूँगी कोई फूल
भले ये ज़मीन बंज़र कहलाए,
काट डालूँगी अपनी ही जड़
कभी कोई छाँव न पाए,
क़तर डालूँगी हर सोच
जो मुझमें उम्मीद जगाए !

नियति की हार नहीं होगी
मेरी जीत कभी नहीं होगी,
मैं शापित हूँ !

हाँ... शापित हूँ मैं !

- जेन्नी शबनम (27. 7. 2010)

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shaapit hun main...

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shaapit hun main...
sirf khona hai
haarne ke liye jina hai !

avaanchhit hun main...
sirf krandan hai
yehsaas hai par bandhan hai !

niyati ka majaaq hun main...
thunth badan hai
par phul khil gaye hain !

nahin ugne dungi koi phul
bhale ye zameen banjar kahlaaye,
kaat daalungi apni hin jad
kabhi koi chhanv na paaye,
qatar daalungi har soch
jo mujhmen ummid jagaaye !

niyati ki haar nahin hogi
meri jeet kabhi nahin hogi,
main shaapit hun !

haan... shaapit hun main !

- jenny shabnam (27. 7. 2010)

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