Saturday, March 3, 2012

327. ऐसा वास्ता रखना

ऐसा वास्ता रखना

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हमारे दरम्यान इतना फ़ासला रखना
बसर हो सकें रिश्ते ऐसा वास्ता रखना !

लरजते आँसुओं के शबनमी बयाँ
दोस्तों की महफ़िल से बचा रखना !

काँटों से बचा के दामन हम आयेंगे
वस्ल की शाम अधूरी बहला रखना !

कारवाँ थम जाए जो तूफ़ान से कहीं
ख्यालों की एक बस्ती सजा रखना !

बेमुरव्वत दुनिया की फ़िक्र कौन करे
मेरे वास्ते ज़िन्दगी का आसरा रखना !

सवाल पूछ ग़ैरों के सामने शर्मिंदा न करना
मेरे जीस्त की नादानियों को छिपा रखना !

'शब' को मिल जाए अंधेरों से निज़ात
दिल में एक चराग तुम जला रखना !

- जेन्नी शबनम (मार्च 3, 2012)

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