Wednesday, January 25, 2012

स्वतः नहीं जन्मी...

स्वतः नहीं जन्मी...

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नहीं मालूम
मैं हैरान हूँ
या परेशान
पर
यथास्थिति को समझने में
नाकाम हूँ,
समझ नहीं आता
ज़िन्दगी की करवटों को
किस रूप में लूँ
जिस चुप्पी को मैंने ओढ़ लिया
या उसे
जिसे मानने केलिए
दिल सहमत नहीं,
मेरे दोस्त
मौनता मुझमें
स्वतः नहीं जन्मी
न उपजी है
मुझमें,
मैंने ख़ामोशी को
जन्म दिया है
वक़्त से निभाकर,
अब दरकिनार हो गई ज़िन्दगी
उन सबसे
जिसमें तूफ़ान भी था
नदी भी
और बरसते हुए बादल भी,
तसल्ली से देखो
सब अपनी अपनी जगह
आज भी यथावत हैं,
मैं ही नामुराद
न बह सकी
न चल सकी
न रुक सकी !

- जेन्नी शबनम (जनवरी 17, 2012)

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