शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

185. किसी बोल ने चीर तड़पाया...

किसी बोल ने चीर तड़पाया...

*******

पोर-पोर में पीर समाया
किसने है ये तीर चुभाया !

मन का हाल नहीं पूछा और
पूछा किसने धीर चुराया !

गूँगी इच्छा का मोल ही क्या
गंगा का बस नीर बताया !

नहीं कभी कोई राँझा उसका
फिर भी सबने हीर बुलाया !

न भूली शब्दों की भाषा 'शब'
किसी बोल ने चीर तड़पाया !

................................................

चीर का अर्थ यहाँ - चीरना (दिल चीर देना)
बोल का अर्थ यहाँ - किसी के कहे हुए शब्द
.................................................

- जेन्नी शबनम (29. 10. 2010)

____________________________________