Friday, October 29, 2010

किसी बोल ने चीर तड़पाया...

किसी बोल ने चीर तड़पाया...

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पोर पोर में पीर समाया
किसने है ये तीर चुभाया !

मन का हाल नहीं पूछा और
पूछा किसने धीर चुराया !

गूंगी इच्छा का मोल हीं क्या
गंगा का बस नीर बताया !

नहीं कभी कोई रांझा उसका
फिर भी सबने हीर बुलाया !

न भूली शब्दों की भाषा ''शब''
किसी बोल ने चीर तड़पाया !

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चीर का अर्थ यहाँ - चीरना (दिल चीर देना)
बोल का अर्थ यहाँ - किसी के कहे हुए शब्द
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__ जेन्नी शबनम __ २९. १०. २०१०

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