Monday, January 31, 2011

तय था...

तय था...

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तय था
प्रेम का बिरवा लगायेंगे
फूल खिलेंगे और
सुगंध से भर देंगे
एक दूजे का दामन हम !

तय तो था
अंजुरी में भर
खुशिया लुटाएँगे
जब थक कर
एक दूजे को समेटेंगे हम !

तय ये भी था
मिट जाएँ बेरहम ज़माने के
हाथों मगर
दिल में लिखे नाम
मिटने न देंगे कभी हम !

तय ये भी तो था
बिछड़ गए ग़र तो
एक दूजे की
यादों को सहेजकर
अर्ध्य देंगे हम !

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम ?

__ जेन्नी शबनम __ 30 . 1 . 2011

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