Friday, June 7, 2013

408. खूँटे से बँधी गाय...

खूँटे से बँधी गाय...

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खूँटे से बँधी गाय 
जुगाली करती-करती 
जाने क्या-क्या सोचती है  
अपनी ताकत 
अपनी क्षमता 
अपनी बेबसी 
और गौ पूजन की परंपरा 
जिसके कारण वह जिंदा है  
या फिर इस कारण भी कि
वैसी ज़रूरतें 
जिन्हें सिर्फ वो ही पूरी कर सकती है  
शायद उसका कोई विकल्प नहीं 
इस लिए जिंदा रखी गई है  
जब चाहा 
दूसरे खूँटे से उसे बाँध दिया गया 
ताकि ज़रूरतें पूरी करे  
कौन जाने 
खुदा की मंशा 
कौन जाने 
तकदीर का लिखा 
उसके गले का पगहा 
उसके हर वक़्त को बाँध देता है 
ताकि वो आज़ाद न रहे कभी 
और उसकी ज़िंदगी 
पल-पल शुक्रगुज़ार हो उनका 
जिन्होंने 
एक खूँटा दिया 
और खूँटा गड़े रहने की जगह 
ताकि 
खूँटे के उस दायरे में 
उसकी ज़िंदगी सुरक्षित रहे  
और वक़्त की इंसाफी  
उसके खूँटे की 
ज़मीन आबाद रहे !

- जेन्नी शबनम (7. 6. 2013)

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