Sunday, March 13, 2011

कब उजास होता है...

कब उजास होता है...

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जाने कौन है जो आस पास होता है
दर्द यूँ ही तो नहीं ख़ास होता है !

बहकते क़दमों को भला रोकें कैसे
हर तरफ उनका एहसास होता है !

वो समझते नहीं है दिल की सदा
ज़ख़्म दिखाना भी परिहास होता है !

वक़्त की जादूगरी भी क्या खूब है
हँस-हँस कर जीवन उदास होता है !

ज़िन्दगी बसर कैसे हो भला उनकी
जिनके दिल में इश्क का वास होता है !

गैरों के बदन को बेलिबास कर जाए
उनके मन पर कब लिबास होता है !

'शब' सोचती है कल मिलेंगे उजाले से
तकदीर में कब उसके उजास होता है !

- जेन्नी शबनम (11. 3. 2011)

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