Saturday, November 1, 2014

473. तारों का बाग़ (दिवाली के 8 हाइकु)

तारों का बाग़ 
(दिवाली के 8 हाइकु) 

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1.
तारों के गुच्छे 
ज़मीं पे छितराए 
मन लुभाए ! 

2.
बिजली जली  
दीपों का दम टूटा  
दिवाली सजी !

3.
तारों का बाग़ 
धरती पे बिखरा 
आज की रात ! 
 
4.
दीप जलाओ 
प्रेम प्यार की रीत 
जी में बसाओ ! 

5.
प्रदीप्त दीया  
मन का अमावस्या  
भगा न सका ! 

6.
रात ने ओढ़ा  
आसमां का काजल  
दिवाली रात ! 

7.
आतिशबाजी 
जुगनुओं की रैली  
तम बेचारा ! 

8.
भगा न पाई 
दुनिया की दीवाली 
मन का तम !  

- जेन्नी शबनम ( 20. 10. 2014) 

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