Wednesday, September 21, 2011

मैं तेरी सूरजमुखी...

मैं तेरी सूरजमुखी...

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ओ मेरे सूरज
मैं तेरी सूरजमुखी (सूर्यमुखी)
बाट जोहते जोहते मुर्झाने लगी,
कई दिनों से तू आया नहीं
जाने कौन सी राह पकड़ ली तूने
कौन ले गया तुझे?
क्या ये भी बिसर गया
कि सारा दिन तुझे हीं तो निहारती हूँ
जीवन ऐसे हीं तेरे संग बिताती हूँ,
तुम चाहो न चाहो
तेरे बिना रह नहीं सकती
चाहूँ फिर भी तुम बिन खिल नहीं सकती,
जानती हूँ तुम्हारा साथ बस दिन भर का है
फिर तू अपनी राह मैं अपनी राह
अगली सुबह फिर तेरी राह,
लड़ लिया करो न, बादलों से मेरे लिए
ओ मेरे सूरज
मैं तेरी सूरजमुखी !

- जेन्नी शबनम (सितम्बर 17, 2011)

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