सोमवार, 3 जनवरी 2011

199. अनाम भले हो...

अनाम भले हो...

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तुम्हारी बाहें थाम
पार कर ली रास्ता,
तनिक तो संकोच होगा
भरोसा भले हो !

नहीं होता आसान
आँखें मूँद चलना,
कुछ तो संशय होगा
साहस भले हो !

दायरे से निकलना
मनचाहा करना,
कुछ तो नसीब होगा
कम भले हो !

साथ जीने की लालसा
आतुरता भी बहुत,
शायद ये प्रेम होगा
अनाम भले हो !

- जेन्नी शबनम (3. 1. 2011)

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