मंगलवार, 5 जनवरी 2021

707. कहानियाँ (5 क्षणिकाएँ)

कहानियाँ  

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1.
छोटे-छोटे लम्हों में   
यादों की ढेरों कतरन हैं   
सबको इकट्ठाकर   
छोटी-छोटी कहानी रचती हूँ   
अकेलेपन में   
यादों से कहानियाँ निकल   
मेरे चेहरे पे खिल जाती हैं।   

2. 
मेरे युग के प्रारम्भ से   
मेरे युग के अंत तक की   
कथा लिख दी किसी ने,   
किसने, यह नहीं मालूम   
न भाषा मालूम न लिखावट   
पर इतना मालूम है   
कहानी मेरी है।

3.
रात के धागे में हर रोज़   
यादों के मोती पिरोती हूँ   
हर मोती एक कहानी   
हर कहनी मेरी ज़िन्दगी   
अब सब चाँद के लॉकर में   
रख दिया है संजोकर   
जीवन के अमावस में   
जरूरत पड़ेगी।   

4. 
बचपन की कहानी बड़ी निराली   
दो पंक्तियों में पूरी कहानी   
एक था राजा एक थी रानी   
दोनों मर गए ख़तम कहानी   
तब मालूम कहाँ था   
जीने और मरने के बीच बनती है   
जीवन की असली कहानी।   

5.
कहानी में मैं   
मुझमें ही कहानी   
कहता कौन सुनता कौन   
पन्नों पर रच दी कहानी   
मैं बन गई इतिहास।

- जेन्नी शबनम (5. 1. 2021)
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