Wednesday, March 6, 2013

388. चाँद का रथ (7 हाइकु)

चाँद का रथ (7 हाइकु)

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1.
थी विशेषता  
जाने क्या-क्या मुझमें,
हूँ अब व्यर्थ !

2.
सीले-सीले-से
गर हों अजनबी, 
होते हैं रिश्ते !

3.
मन का द्वन्द 
भाँपना है कठिन
किसी और का !

4.
हुई बावली 
सपनों में गुजरा 
चाँद का रथ !

5. 
जन्म के रिश्ते 
सदा नहीं टिकते 
जग की रीत ! 

6.
अनगढ़-से
कई-कई किस्से हैं 
साँसों के संग !

7.
हाइकु ऐसे   
चंद लफ़्ज़ों में पूर्ण 
ज़िन्दगी जैसे !

- जेन्नी शबनम (फरवरी 18, 2013)

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