शनिवार, 18 दिसंबर 2010

196. जादू की एक अदृश्य छड़ी...

जादू की एक अदृश्य छड़ी...

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तुम्हारे हाथों में रहती है
जादू की एक अदृश्य छड़ी,
जिसे घुमा कर
करते हो
अपनी मनचाही
हर कामना पूरी
और रचते हो
अपने लिए
स्वप्निल संसार !

उसी छड़ी से छू कर
बना दो मुझे
वो पवित्र परी
जिसे तुम अपनी
कल्पनाओं में देखते हो
और अपने स्पर्श से
प्राण फूँकते हो !

फिर मैं भी
हिस्सा बन जाऊँगी
तुम्हारे संसार का,
और जाना न होगा मुझे
उस मृत वन में
जहाँ हर पहर ढूँढती हूँ मैं
अपने प्राण !

- जेन्नी शबनम (13. 12. 2010)

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