बुधवार, 20 मई 2020

665. कहा-सुनी जारी है

कहा-सुनी जारी है

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पल-पल समय के साथ, कहा-सुनी जारी है   
वो कहता रहता है, मैं सुनती रहती हूँ,   
अरेब-फरेब, जो उसका मन, बोलता रहता है   
कान में पिघलता सीसा, उड़ेलता रहता है   
मैं हूंकार भरती रहती हूँ, मुस्कुराती रहती हूँ   
अपना अपनापा दिखाती रहती हूँ,   
नहीं याद क्या-क्या सुनती रहती हूँ   
नहीं याद क्या-क्या बिसराती जाती हूँ   
जितना मेरा मन किया, उतना ही सुनती हूँ   
बहुत कुछ अनसुना करती हूँ,   
न उसे पता कि मैंने क्या-क्या न सुना   
न मुझे पता कि उसने मुझे कितना-कितना धिक्कारा   
कितना-कितना दुत्कारा,   
फिर भी सब कहते हैं   
हमारे बीच बड़ा प्यारा संबंध है   
न हम लड़ते-झगड़ते दिखते हैं   
न कभी कहा-सुनी होती है   
बहुत प्यार से हम जीते हैं,   
यह हर कोई जानता है   
कहासुनी में दोनों को बोलना पड़ता है   
अपना-अपना कहना होता है   
दूसरों का सुनना होता है,   
पर मेरे और समय के बीच   
अजब-सा नाता है   
वो कहता जाता है, मै सुनती जाती हूँ   
और कहा-सुनी जारी रहती है,   
कहा-सुनी जारी है। 

 - जेन्नी शबनम (20. 5. 2020) 
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