शुक्रवार, 11 मार्च 2011

219. चलते रहें हम...

चलते रहें हम...

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दूर आसमान के पार तक
या धरती के अंतिम छोर तक
हाथ थामे चलते रहें हम !
आओ कोई गीत गायें
प्रेम की बात करें
चलो यूँ ही चलते रहें हम !
तुम्हारी बाहों का सहारा
आँखें मूँद खो जाएँ
साथ चले स्वप्न चलते रहें हम !
'शब' तो जागती है रोज़
साथ जागो तुम भी कभी
और बस
चलते रहें हम !

- जेन्नी शबनम (10. 3. 2011)

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