Friday, March 11, 2011

चलते रहें हम...

चलते रहें हम...

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दूर आसमान के पार तक
या धरती के अंतिम छोर तक
हाथ थामे
चलते रहें हम !
आओ कोई गीत गायें
प्रेम की बात करें
चलो यूँ हीं
चलते रहें हम !
तुम्हारी बाहों का सहारा
आँखें मूंद खो जाएँ
साथ चले स्वप्न
चलते रहें हम !
''शब'' तो जागती है रोज़
साथ जागो तुम भी कभी
और बस
चलते रहें हम !

__ जेन्नी शबनम __ 10. 3. 2011

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