Saturday, April 5, 2014

448. पात झरे यूँ (पतझर पर 10 हाइकु)

पात झरे यूँ 
(पतझर पर 10 हाइकु)

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1.
पात झरे यूँ 
तितर-बितर ज्यूँ 
चाँदनी गिरे ।

2.
पतझर ने 
छीन लिए लिबास
गाछ उदास 

3.
शैतान हवा
वृक्ष की हरीतिमा
ले गई उड़ा 

4.
सूनी है डाली
चिड़िया न तितली
आँधी ले उड़ी ।

5.
ख़ुशी बिफ़री 
मन में पतझर
उदासी फैली 

6.
खुशियाँ झरी
जिन्दगी की शाख से
ज्यों पतझर ।

7.
काश मैं होती
गुलमोहर जैसी
बेपरवाह ।

8.
फिर खिलेगी
मौसम कह गया
सूनी बगिया ।

9.
न रोको कभी
आकर जाएँगे ही
मौसम सभी ।

10.
जिन्दगी ऐसी
पतझर के बाद
वीरानी जैसी ।

- जेन्नी शबनम (4. 4. 2014)

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