Monday, January 2, 2012

एक नई शुरुआत...

एक नई शुरुआत...

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माना कि बहुत कुछ छूट गया
एक और सपना टूट गया,
पार कर लिया तो कर लिया
उस रास्ते पर दोबारा क्यों जाना
जहाँ पाँव में छाले पड़े
सीने में शूल चुभे
बोझिल साँसे जाने कब रुके !

सपने जीवन का अंत नहीं
एक नई शुरुआत भी तो है,
कुछ ऐसे सपने सजाओ
कि ज़िन्दगी जीने को मचल उठे
बार-बार नहीं देखो वैसे सपने
जिसके टूटने पर
ज़िन्दगी अपनी अहमियत खो दे !

नई राह में
संभावना तो है
कि शायद
एक नई दिशा मिले
जो जीवन के लिए लाज़िमी हो
जहाँ सुकून के कुछ पल हों
और सपनों को मंज़िल मिले !

- जेन्नी शबनम (जनवरी 1, 2012)

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