रविवार, 30 दिसंबर 2018

598. वृद्ध जीवन (वृद्धावस्था पर 20 हाइकु)

वृद्ध जीवन 

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1.   
उम्र की साँझ   
बेहद डरावनी   
टूटती आस।   

2.   
अटकी साँस   
बुढापे की थकान   
मन बेहाल।   

3.   
वृद्ध की कथा   
कोई न सुने व्यथा   
घर है भरा।   

4.   
दवा की भीड़   
वृद्ध मन अकेला   
टूटता नीड़।   

5.   
अकेलापन   
सबसे बड़ी पीर   
वृद्ध जीवन।   

6.   
उम्र जो हारी   
एक पेट है भारी   
सब अपने।   

7.
धन के नाते   
मन से हैं बेगाने   
वृद्ध बेचारे।   

8.   
वृद्ध से नाता   
अपनों ने था छोड़ा   
धन ने जोड़ा।   

9.   
बदले कौन   
मखमली चादर   
बुढ़ापा मौन।   

10.   
बहता नीर   
यही जीवन रीत   
बुढ़ापा भारी।   

11.   
उम्र का चूल्हा   
आजीवन सुलगा   
अब बुझता।   

12.   
किससे कहें?   
जीवन-साथी छूटा   
ढेरों शिकवा।   

13.   
बुढ़ापा खोट   
अपने भी भागते   
कोई न ओट।   

14.   
वृद्ध की आस   
शायद कोई आए   
टूटती साँस।   

15.   
ग़म का साया   
बुजुर्ग का अपना   
यही है सच।   

16.   
जीवन खिले   
बुजुर्गों के आशीष   
खूब जो मिले।   

17.   
टूटा सपना   
कौन सुने दुखड़ा   
वृद्ध अकेला।   

18.   
वक्त ने कहा -   
याद करो जवानी   
भूल अपनी।   

19.   
वक्त है लौटा   
बुजुर्ग का सपना   
सब हैं साथ।   

20.
वृद्ध की लाठी
बस गया विदेश
भूला वो माटी। 

- जेन्नी शबनम (24. 12. 2018)

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मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

597. बातें (क्षणिका)

बातें 

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रात के अँधेरे में   
मैं ढेरों बातें करती हूँ 
जानती हूँ मेरे साथ 
तुम कहीं नहीं थे   
तुम कभी नहीं थे 
पर सोचती रहती हूँ 
तुम सुन रहे हो 
और खुद से बातें करती हूँ।   

- जेन्नी शबनम (25. 12. 2018)   

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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

596. दुःख (दुःख पर 10 हाइकु)

दुःख (10 हाइकु)   

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1.   
दुःख का पारा 
सातवें आसमाँ पे   
मन झुलसा !   

2.   
दुःख का लड्डु   
रोज-रोज यूँ खाना   
बड़ा ही भारी !   

3.   
दुःख की नदी 
बेखटके दौड़ती   
बे रोक-टोक !   

4.   
साथी है दुःख   
साथ है हरदम 
छूटे न दम !   

5.   
दुःख की वेला 
कभी तो गुजरेगी   
मन में आस !   

6.   
दुःख की रोटी 
भरपेट है खाई   
फिर भी बची !   

7.   
दुःख अतिथि 
जाने की नहीं तिथि   
बड़ा बेहया !   

8.   
दुख की माला 
काश ये टूट जाती   
सुकून पाती !   

9.   
मस्त झूमता 
बड़ा ही मतवाला   
दुःख है योगी !   

- जेन्नी शबनम (28. 9. 2018)   

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बुधवार, 5 दिसंबर 2018

595. अर्थ ढूँढ़ता (10 हाइकु)

अर्थ ढूँढ़ता 
(10 हाइकु)   

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1.   
मन सोचता -   
जीवन है क्या ?   
अर्थ ढूँढता।   

2.   
बसंत आया   
रिश्तों में रंग भरा   
मिठास लाया।   

3.   
याद-चाशनी   
सुख की है मिठाई   
मन को भायी।   

4.   
फिक्र व चिन्ता   
बना गए दुश्मन,   
रोगी है काया।   

5.   
वक्त की धूप   
शोला बन बरसी   
झुलसा मन।   

6.   
सुख व दुख   
यादों का झुरमुट   
अटका मन।   

7.   
खामोश बही   
गुमनाम हवाएँ   
ज्यों मेरा मन।   

8.   
मैं सूर्यमुखी   
तुम्हें ही निहारती   
तुम सूरज।   

9.   
मेरी वेदना   
सर टिकाए पड़ी   
मौन की छाती।   

10.   
छटपटाती   
साँस लेने को   
बीमार हवा।   

- जेन्नी शबनम (23. 11. 2018)   

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