Sunday, April 20, 2014

451. मतलब...

मतलब...

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छोटे-छोटे दुःख सुनना
न मुझे पसंद है न तुम्हें  
यूँ कभी तुमने भी मना नहीं किया कि न बताऊँ 
पर जिस अनमने भाव से सब सुनते हो 
समझ आ जाता है कि तुमको पसंद नहीं आ रहा 
हमारे बीच ऐसा अनऔपचारिक रिश्ता है कि
हम कुछ भी किसी को बताने से मना नहीं करते 
परन्तु 
सिर्फ कहने भर को कहते हैं 
सुनने भर को सुनते हैं
न जानना चाहते हैं 
न समझना चाहते हैं    
हम कोई मतलब नहीं रखते
एक दूसरे के 
सुख से 
दुःख से 
ज़िंदगी से 
फितरत से 
बस एक कोई गाँठ है 
जो जोड़े हुए है 
जो टूटती नहीं 
शायद 
इस लिए हम जुड़े हुए हैं 
अपना-अपना मतलब साध रहे हैं !

- जेन्नी शबनम (20. 4. 2014)

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