Friday, April 26, 2013

402. जन्म का खेल (7 हाइकु)

जन्म का खेल (7 हाइकु)

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1.
हर जन्म में 
तलाशती ही रही 
ज़रा-सी नेह !

2.
प्रतीक्षारत 
एक नए युग की 
कई जन्मों से !

3.
परे ही रहा 
समझ से हमारे 
जन्म का खेल !

4.
जन्म के साथी 
हो ही जाते पराए
जग की रीत !

5.
रोज़ जन्मता 
पल-पल मर के 
है वो इंसान !

6.
शाश्वत खेल 
न चाहें पर खेलें 
जन्म-मरण !

7.
जितना सच 
है जन्म, मृत्यु भी है 
उतना सच !

- जेन्नी शबनम (26. 4. 2013)

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