Tuesday, May 10, 2011

तन्हा-तन्हा हम रह जाएँगे...

तन्हा-तन्हा हम रह जाएँगे...

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सब छोड़ जाएँगे जब हमको
तन्हा-तन्हा हम रह जाएँगे,
किसे बताएँगे ग़म औ खुशियाँ
सदमा कैसे हम सह पाएँगे !

किसकी तकदीर में क्यों हुए वो शामिल
कभी नहीं हम कह पाएँगे,
अपनी हाथ की फिसलती लकीरों में
उनको सँभाल हम कब पाएँगे !

है अज़ब पहेली ज़िन्दगी
उलझन सुलझा कैसे हम पाएँगे,
हर तरफ फैला सन्नाटा
यूँ ही पुकारते हम रह जाएँगे !

हर रोज़ तकरार करते हैं
और कहते कि वो चले जाएँगे,
अपनी शिकायत किससे करें
गैरों से नहीं हम कह पाएँगे !

जाने कैसे कोई रहता तन्हा
मगर नहीं हम रह पाएँगे,
ज़िन्दगी की बाबत बोली 'शब'
तन्हाई नहीं हम सह पाएँगे|

- जेन्नी शबनम (8. 5. 2011)

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