Tuesday, February 19, 2013

383. औरत : एक बावरी चिड़ी (7 हाइकु)

औरत : एक बावरी चिड़ी (7 हाइकु)

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1.
चिड़िया उड़ी
बाबुल की बगिया 
सूनी हो गई ।

2.
ओ चिरइया 
कहाँ उड़ तू चली 
ले गई ख़ुशी ।

3.
चिड़ी चाहती
मन में ये कहती -
''बाबुल आओ !''

4.
चिड़ी कहती -
काश ! वह जा पाती 
बाबुल घर ।

5.
बावरी चिड़ी
गैरों में वो ढूँढती
अपनापन ।

6.
उड़ी जो चिड़ी
रुकती नहीं कहीं 
यही ज़िंदगी ।

7.
लौट न पाई  
एक बार जो उड़ी 
कोई भी चिड़ी ।

- जेन्नी शबनम (फरवरी 1, 2013)

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