Friday, July 17, 2015

495. दूब (घास पर 11 हाइकु)

दूब (घास पर 11 हाइकु)

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1.

बारहों मास
देती बेशर्त प्यार
दुलारी घास ! 


2.
नर्म-नर्म-सी 
हरी-हरी ओढ़नी  
भूमि ने ओढ़ी ! 

3.
मोती बिखेरे    
शबनमी दूब पे,  
अरूणोदय !

4.
दूब की गोद
यूँ सुखद प्रतीति  
ज्यों माँ की गोद !

5.
पीली हो गई 
मेघ ने मुँह मोड़ा    
दूब बेचारी ! 

6.
धरा से टूटी
ईश के पाँव चढ़ी
पावन दूभी !

7.
तमाम रात
रोती रही है दूब
अब भी गीली !

8.
नर्म बिछौना
पथिक का सहारा
दूब बेसूध !

9.
कभी आसन
कभी बनी भोजन,
कृपालु दूर्बा !

10.
ठंड व गर्म
मौसम को झेलती
अड़ी रहती !

11.
कर्म पे डटी
कर्तव्यपरायणा,
दूर्बा-जीवन ! 

- जेन्नी शबनम (21. 3. 2015)

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