बुधवार, 30 सितंबर 2015

498. तुम्हारा इंतज़ार है...

तुम्हारा इंतज़ार है...

*******

मेरा शहर अब मुझे आवाज़ नहीं देता  
नहीं पूछता मेरा हाल
नहीं जानना चाहता
मेरी अनुपस्थिति की वजह
वक़्त के साथ शहर भी
संवेदनहीन हो गया है
या फिर नई जमात से फ़ुर्सत नहीं   
कि पुराने साथी को याद करे
कभी तो कहे कि आ जाओ
''तुम्हारा इंतज़ार है''!  

- जेन्नी शबनम (30. 9. 2015)  

____________________________ 

सोमवार, 21 सितंबर 2015

497. मगज का वो हिस्सा...

मगज का वो हिस्सा...

*******

अपने मगज के उस हिस्से को 
काट देने का मन होता है
जहाँ पर विचार जन्म लेते हैं
और फिर होती है
व्यथा की अनवरत परिक्रमा,
जाने मगज़ का कौन सा हिस्सा है
जो जवाबदेह है
जहाँ सवाल ही सवाल उगते हैं
जवाब नहीं उगते
और जो मुझे सिर्फ पीड़ा देते हैं,
उस हिस्से के न होने से
न विचार जन्म लेंगे
न वेदना की गाथा लिखी जायेगी
न कोई अभिव्यक्ति होगी 
न कोई भाषा 
न कविता !

- जेन्नी शबनम (21. 9. 2015)

____________________________