Wednesday, September 14, 2016

529. हिन्दी खिलेगी (हिन्दी दिवस पर 9 हाइकु)

हिन्दी खिलेगी
(हिन्दी दिवस पर 9 हाइकु)

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1.   
मन की बात   
कह पाएँ सबसे   
हिन्दी के साथ।   

2.   
हिन्दी रूठी है   
अंग्रेज़ी मातृभाषा   
बन ऐंठी है।   

3.   
सपना दिखा   
हिन्दी अब भी रोती   
आज़ादी बाद।   

4.   
हिन्दी की बोली   
मात खाती रहती   
पढ़े लिखों से।   

5.   
हिन्दी दिवस   
एक दिन का जश्न   
फिर अँधेरा ।   

6.   
हमारी हिन्दी   
हमारा अभिमान   
सब दो मान।   

8.   
है इन्कलाब   
सब जुट जाएँ तो   
हिन्दी की शान।   

9.   
हिन्दी हँसती   
राजभाषा तो बनी,   
कहने भर।   

10.   
सुबह होगी   
देश के ललाट पे   
हिन्दी खिलेगी।   

- जेन्नी शबनम (14. 9. 2016)

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Friday, September 9, 2016

528. देर कर दी...

देर कर दी...   

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हाँ ! देर कर दी मैंने   
हर उस काम में जो मैं कर सकती थी   
दूसरों की नज़रों में  
ख़ुद को ढालते-ढालते  
सबकी नज़रों से छुपाकर   
अपने सारे हुनर   
दराज में बटोर कर रख दी   
दुनियादारी से फ़ुर्सत पाकर   
करूँगी कभी मन का।  

अंतत: अब   
मैं फिजुल साबित हो गई  
रिश्ते सहेजते-सहेजते  
ख़ुद बिखर गई  
साबुत कुछ नहीं बचा  
न रिश्ते न मैं न मेरे हुनर।  

मेरे सारे हुनर   
चीख़ते-चीख़ते दम तोड़ गए  
बस एक दो जो बचे हैं   
उखड़ी-उखड़ी साँसें ले रहे हैं   
मर गए सारे हुनर के क़त्ल का  
इल्ज़ाम मुझको दे रहे है  
मेरे क़ातिल बन जाने का सबब  
वे मुझसे पूछ रहे हैं।  

हाँ ! बहुत देर कर दी मैंने  
दुनिया को समझने में  
ख़ुद को बटोरने में  
अर्धजीवित हुनर को  
बचाने में।   

हाँ ! देर तो हो गई  
पर सुबह का सूरज  
अपनी आँच मुझे दे रहा है  
अंधेरों की भीड़ से  
खींच कर मुझे  
उजाला दे रहा है।  

हाँ ! देर तो हो गई मुझसे  
पर अब न होगी   
नहीं बचा वक़्त  
मेरे पास अब  
जो भी बच सका है  
रिश्ते या हुनर   
सबको एक नई उम्र दूँगी   
हाँ ! अब देर न करूँगी।   

- जेन्नी शबनम (9. 9. 2016)

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