सोमवार, 24 अप्रैल 2017

544. सुख-दुःख जुटाया है...

सुख-दुःख जुटाया है...  

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तिनका-तिनका जोड़कर 
सुख-दुःख जुटाया है,   
सुख कभी-कभी झाँककर   
अपने होने का एहसास कराता है   
दुःख सोचता है   
कभी तो मैं भूलूँ उसे   
ज़रा देर वो आराम करे 
मेरे मायके की   
टिन वाली पेटी में,   
तिनका-तिनका जोड़कर   
मैंने सुख-दुख जुटाया है।  

- जेन्नी शबनम (24. 4. 2017)

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