Saturday, November 2, 2013

422. दीप-दीपाली (दीपावली पर 18 हाइकु)

दीप-दीपाली 
(दीपाली पर 18 हाइकु)

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1.
उतरे नीचे
नक्षत्र आसमां के
ज़मीन पर ।

2.
लौटे प्रवासी
त्योहार का मौसम
सजी दिवाली ।

3.
राम प्रवासी
लौटे हो के विजयी
दिवाली सजी ।

4.
तमाम रात
बेताबी से जलती
दीप-दीपाली ।

5.
बड़ी बेताबी
मगर हौले-हौले
जलती बाती ।

6.
आख़िर भागा
एक दिन ही सही
तम अभागा ।

7.
जुगनू लाखों
धरती पर नाचे
साथ ही जले ।

8.
विफल हुई
अँधेरों की साज़िश
रोशनी जीती ।

9.
है इतराई
रोशनी छितराई
दिवाली आई ।

10.
मुठ्ठी से गिरी
धरा पर रौशनी
आसमान से ।

11.
अँधेरा भागा
उजाले से डर के
रोशनी नाची ।

12.
चादर तान
आज अँधेरा सोया
दीपक जला ।

13.
जीते रोशनी
महज़ एक दिन
हारे अँधेरा ।

14.
खुल के हँसी
जगमग रोशनी
अँधेरा चुप ।

15.
चाँद सितारे
उतरे ज़मीन पे
धरा सजाने ।

16.
रात है काली
दीयों से सजकर
ख़ूब शर्माती ।

17.
घूँघट काढ़े
धरती इठलाती
दीया जलाती ।


18.
घर-घर में
बरसी है चाँदनी
अमावस में ।

- जेन्नी शबनम (1. 11. 2013)

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