Thursday, May 21, 2009

59. ज़िन्दगी तमाम हो जाएगी...

ज़िन्दगी तमाम हो जायएगी...

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पल भर मिले
लम्हा भर थमे
कदम भर भी तो साथ न चले,
यूँ साथ हम चले ही कब थे ?
जो अब
न चलने का हुक्म देते हो ! 
एक दूसरे को
आख़िरी पल-सा देखते हुए
दो समीप समानांतर राहों पर चल दिए थे,
चाहा तो तुमने ही था सदा
मैंने नहीं
फिर भी
इल्ज़ाम मुझे ही देते हो !  
चलो यूँ ही सही
ये भी कुबूल है
मेरी व्यथा ही
तुम्हारा सुकून है,
बसर तो होनी है
हर हाल में हो जाएगी
सफ़र मुकम्मल न सही
ज़िन्दगी तमाम हो जाएगी ! 

- जेन्नी शबनम (मई 21, 2009)

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