मंगलवार, 31 मार्च 2009

47. बीती यादें...

बीती यादें...

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याद आता है वो लम्हा बार-बार
जब तुमने
अपने दिल की बात कही थी

मैंने तुम्हें सिर्फ देखा
उत्तर न तो 'ना' था
न ही कोई बोल फूटा था

तुम मौन की भाषा समझ गए
मौन स्वीकृति का प्रतीक है
यह तुम भी जान गए थे

निर्विरोध मौन गूँजता रहा
तुम सही थे
इसे मैंने भी समझा था

और हमारे बीच
वो विचित्र बंधन बँध गया
जो देव-दुर्लभ दिव्य अनुभूति बन
सदा के लिए हमारे मन-प्राण को
सिक्त कर गया । 

- जेन्नी शबनम (दिसंबर 2007)

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