Monday, August 29, 2011

शेष न हो...

शेष न हो...

*******

सवाल भी ख़त्म और जवाब भी
शायद ऐसे हीं ख़त्म होते हैं रिश्ते,
जब सामने कोई हो
और कहने को कुछ भी शेष न हो !

- जेन्नी शबनम ( अगस्त 27, 2011)

__________________________________

12 comments:

Sunil Kumar said...

रिश्ते कभी ख़त्म नहीं होते ...

कुश्वंश said...

बेहद सुन्दर

संजय भास्कर said...

एक साथ कई भावों को संजोये बहुत ही सुंदर रचना..

Suresh Kumar said...

सवाल भी ख़त्म और जवाब भी
शायद ऐसे हीं ख़त्म होते हैं रिश्ते,
जब सामने कोई हो
और कहने को कुछ भी शेष न हो !

दिल में उतर गयी आपकी यह रचना..आभार

सहज साहित्य said...

आपने इन थोड़ी -सी पंक्तियों में बहुत बड़ी बात कह दी है । संवादहीनता सारे रिश्तों को दरकिनार कर देती है । यही कारण बन जाता है हमेशा दूर चले जाने का ।बहुत बधाई !

Kunwar Kusumesh said...

जैसे ही आसमान पे देखा हिलाले-ईद.
दुनिया ख़ुशी से झूम उठी है,मनाले ईद.
ईद मुबारक

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर।
--
ई-मेल से धन्यवाद देने की बजाए पोस्ट पर कमेंट करने से रचनाकार को ज्यादा सुख मिलता है!
--
भाईचारे के मुकद्दस त्यौहार पर सभी देशवासियों को ईद की दिली मुबारकवाद।
--
कल गणेशचतुर्थी होगी, इसलिए गणेशचतुर्थी की भी शुभकामनाएँ!

प्रेम सरोवर said...

शबनम जी.
इन परिस्थितियोंमें कहने के लिए बहुत कुछ रह जाता है लेकिन जब सामने वाला सामने बैठा रहता है तो उसकी उपस्थिति सब कुछ भूल जाने के लिए बाध्य कर देती है । उसके जाने के बाद बहुत सारी बातें याद आने लगती हैं कि आह ये बातें तो अनकही ही रह गयी । धन्यवाद । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है ।

amrendra "amar" said...

दिल को छू गए आपकी रचना के भाव ... बहुत अच्छी और भावपूर्ण रचना...

Rachana said...

jab samne .............
kya sunder bhav hain
rachana

डॉ. हरदीप कौर सन्धु said...

बहुत बड़ी बात कम शब्दो में ..
दिल में उतर गयी आपकी यह रचना..
आभार !

फणि राज मणि चन्दन said...

Thode me bahut kuchh kah gayee aap... ye shabdon ki jaadugari nahin to aur kya hai.

Aabhar
Fani Raj