Friday, January 28, 2011

दस्तावेज़...

दस्तावेज़...

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ज़िन्दगी एहसासों का दस्तावेज़ है,
पल-पल हर्फ़ में पिरो दिया,
शायद कभी कोई पढ़े मुझे भी !

- जेन्नी शबनम (26. 1. 2011)

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9 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक ..

kshama said...

Sundar panktiyan!
Gantantr diwas kee mabarak baad qubool karen!

मनोज कुमार said...

सही कहा, ज़िन्दगी अहसासों का दस्तावेज़ है।

mridula pradhan said...

zara si...pyari si....

Udan Tashtari said...

शानदार!

संजय भास्कर said...

ला-जवाब" जबर्दस्त!!

Kailash C Sharma said...

लाज़वाब !

***Punam*** said...

chhoti si aashaa....!!
sundar...ati sundar !!

सहज साहित्य said...

आपने सच कहा है -ज़िन्दगी यादों का ऐसा दस्तावेज़ है , जिससे हम मुकर नहीं सकते । गागर में सागर भर दिया आपने ।