Monday, January 31, 2011

तय था...

तय था...

*******

तय था
प्रेम का बिरवा लगायेंगे
फूल खिलेंगे और
सुगंध से भर देंगे
एक दूजे का दामन हम !

तय तो था
अंजुरी में भर
खुशिया लुटाएँगे
जब थक कर
एक दूजे को समेटेंगे हम !

तय ये भी था
मिट जाएँ बेरहम ज़माने के
हाथों मगर
दिल में लिखे नाम
मिटने न देंगे कभी हम !

तय ये भी तो था
बिछड़ गए ग़र तो
एक दूजे की
यादों को सहेजकर
अर्ध्य देंगे हम !

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम ?

__ जेन्नी शबनम __ 30 . 1 . 2011

____________________________________________________

22 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" said...

प्रेम का बिरवा लगायेंगे
फूल खिलेंगे और
सुगंध से भर देंगे
एक दूजे का दामन हम !
--
यही तो जीवन का सार है!

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

'बस ये तय न कर पाए थे
...............................
......क्या करेंगे हम '
बहुत ही सुन्दर रचना ...

vijaymaudgill said...

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम ?


kya baat hai dost end bahut ki kamaaal hai. bahut khoob

: केवल राम : said...

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम ?


फिर से नए सपने सजा लेना ..जिन्दगी में यही तो होता है ..पर जिन्दगी कब कहाँ रूकती है ...बहुत सुंदर

Sadhana Vaid said...

बहुत ही सुन्दर रचना शबनम जी ! कितनी खूबसूरती से मन की पीड़ा को शब्द दिए हैं आपने ! वाह ! बधाई एवं शुभकामनायें !

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

आज ४ फरवरी को आपकी यह सुन्दर भावमयी पोस्ट चर्चामंच पर है... आपका आभार ..कृपया वह आ कर अपने विचारों से अवगत कराएं

http://charchamanch.uchcharan.com/2011/02/blog-post.html

Sadhana Vaid said...

बहुत ही मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति है शबनम जी !

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम ?
हृदय को अंदर तक भिगो गयी आपकी रचना ! बधाई एवं शुभकामनायें !

जयकृष्ण राय तुषार said...

तय था कि एक दिन हम आपके ब्लॉग पर जरुर आयेंगे |वाकई एक बेहतरीन कविता आपने लिखी है \बहुत बहुत बधाई शबनम जी |

जयकृष्ण राय तुषार said...

तय था कि एक दिन हम आपके ब्लॉग पर जरुर आयेंगे |वाकई एक बेहतरीन कविता आपने लिखी है \बहुत बहुत बधाई शबनम जी |

जयकृष्ण राय तुषार said...

तय था कि एक दिन हम आपके ब्लॉग पर जरुर आयेंगे |वाकई एक बेहतरीन कविता आपने लिखी है \बहुत बहुत बधाई शबनम जी |

जयकृष्ण राय तुषार said...

तय था कि एक दिन हम आपके ब्लॉग पर जरुर आयेंगे |वाकई एक बेहतरीन कविता आपने लिखी है \बहुत बहुत बधाई शबनम जी |

जयकृष्ण राय तुषार said...

तय था कि एक दिन हम आपके ब्लॉग पर जरुर आयेंगे |वाकई एक बेहतरीन कविता आपने लिखी है \बहुत बहुत बधाई शबनम जी |

जयकृष्ण राय तुषार said...

तय था कि एक दिन हम आपके ब्लॉग पर जरुर आयेंगे |वाकई एक बेहतरीन कविता आपने लिखी है \बहुत बहुत बधाई शबनम जी |

Zakir Ali 'Rajnish' said...

जीवन के रंगों को बहुत सुंदर ढंग से चित्रित किया है आपने। बधाई।

---------
ध्‍यान का विज्ञान।
मधुबाला के सौन्‍दर्य को निरखने का अवसर।

Kailash C Sharma said...

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम ?

मन की पीड़ा की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

कुश्वंश said...

सुन्दर अभिव्यक्ति ..अहसासों की कोमल अभिव्यक्ति कहने सुनने से बहुत दूर अहसासों की दुनिया..बधाई

सहज साहित्य said...

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम ?
उपर्युक्त पंक्तियों का अन्तर्द्वन्द्व मन को मथ देता है और इसका उत्तर तलाश करना सचमुच बहुत कठिन है ।प्रत्येक शब्द की मार्मिकता सिर चढ़कर बोलती है ।

सहज साहित्य said...

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम ?
इन पंक्तियों में निहित अन्तर्द्वन्द्व ही इस कविता की सबसे बड़ी शक्ति है । अर्थ की कई छटाएँ अनुस्यूत हैं।

Anonymous said...

जब प्रेम इतनी ढेर सारी संवेदनाओं से भरा हो तो उससे जुड़े सपनों का बिखरना असंभव है |और हाँ यादें हिस्सा बन जाती हैं मन और ह्रदय का ,उन्हें सहेजने की क्या जरुरत ?दिल के हर एक कोने को झंकृत करती रचना

KAHI UNKAHI said...

बहुत खूब...मन मोह लिया आपने जेन्नी जी...।

mridula pradhan said...

बस ये तय न कर पाए थे
कि तय किये सभी
सपने बिखर जाए
फिर...
क्या करेंगे हम
bahut achcha likhtin hain aap lekin udas kar dee apki kavita...

Madhu Rani said...

कविता का अंत बहुत सुंदर है, यही कविता की जान है।दिल के दर्द को सुन्दरता से शब्दों में पिरोया है जेन्नी। बधाई।