Friday, January 20, 2012

मदिरा का नशा...

मदिरा का नशा...

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तुमने तो जाना है
मदिरा नशा है
नशा जो जीवन छीन लेता है
मदिरा जो मतवाला बना देती है,
मदिरा का नशा
तुम क्या जानो दोस्त
घूँट-घूँट पीकर
जब मचलती है ज़िंदगी
यूँ मानो
हमने जीवन को पिया है
पल पल को जिया है,
सिगरेट के छल्लो में
जब उड़ती है ज़िन्दगी
मेरे दोस्त
क्या तुमने देखी है उसमें
ज़िन्दगी की तस्वीर,
कश-कश पीकर
जब चहकती है ज़िन्दगी
यूँ मानो
हमने जीत ली तकदीर
बदल डाली हाथों की लकीर,
पर
मदिरा का नशा
जब उतरता है
धुंआ धुंआ सांसें
उखड़ी उखड़ी चाल
कमबख्त बस बदन टूटता है
मगज कब कहाँ कुछ भूलता है,
मदिरा के नशे ने
पल पल होश दिलाया है
जालिम ज़िन्दगी ने
जब जब तड़पाया है
कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !

- जेन्नी शबनम (जनवरी 15, 2012)

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27 comments:

रश्मि प्रभा... said...

तुम क्या जानो दोस्त
घूँट-घूँट पीकर
जब मचलती है ज़िंदगी
यूँ मानो
हमने जीवन को पिया है... बहुत ही बढ़िया

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !

बेहतरीन पंक्तियाँ।


सादर

कुश्वंश said...

आज की कविता बात अलग हट के कह रही है. सटीक बात कह रही है सरल शब्दों में

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" said...

nashaa to nashaa hotaa
sar par chadh jaaye to
dukhdaayee ho jaataa
nice one

Rakesh Kumar said...

ओह! मदिरा का नशा
जब चढा तो बहुत हसीं लगा
उतरा तो जमीं में जा गडा.

अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार,जेन्नी जी.

संजय भास्कर said...

यूँ मानो
हमने जीत ली तकदीर
बदल डाली हाथों की लकीर,
.....क्या बात है ....!
बहुत बढ़िया लाइने हैं यह !

vidya said...

:-)
यानि पी जाये या ना पी जाये???

just joking...nice poem.
regards.

प्रेम सरोवर said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट " हो जाते हैं क्यूं आद्र नयन पर ": पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद। .

mridula pradhan said...

wah.......bahot achchi......

dheerendra said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति,बेहतरीन पोस्ट..
new post...वाह रे मंहगाई...

मनीष सिंह निराला said...

बहुत बढ़िया रचना !
आभार !

दिगम्बर नासवा said...

Jeevan ke mashe mein, pyaar ke nashe meion jo rahta hai vo madire ke nashe ko nahi jeena chaahta ...

प्रेम सरोवर said...

कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !
कविता अच्छी लगी । भाव भी मन को छू गए । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा .धन्यवाद ।

sushila said...

नशा। एक छलावा मात्र ! दुनिया और दुखों से भागने का उपक्रम मात्र। और इस भागने में वह स्वयं को कितना कमज़ोर बना देता है!

"कश-कश पीकर
जब चहकती है ज़िन्दगी"
वाह!

Naveen Mani Tripathi said...

Shabanam ji madira aur jindgi ke utar -chadhawon ko jodati hui yah rachana vakai bahut prabhavshali lgi ......ak sundar prastuti ke liye bahut bahut abhar.

प्रेम सरोवर said...

मदिरा के नशा ने
पल पल होश दिलाया है
जालिम ज़िन्दगी ने
जब जब तड़पाया है
कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !

बहुत सुंदर है आपकी कविता । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

ये दोनों ,व्यक्ति के साथ साथ उसके परिवार को भी
नहीं बख्शते.सुंदर संदेश...

Dr.Nidhi Tandon said...

ज़िंदगी का नशा..प्यार का नशा...मदिरा से ज्यादा सर चढ के बोलता है....सच!!

Rakesh Kumar said...

जेन्नी जी,मेरी टिपण्णी दिखलाई नही पड़ रही है.
आपका मेरे ब्लॉग पर इंतजार रहता है जी.

Atul Shrivastava said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट्स पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

dheerendra said...

मदिरा का नशा
जब उतरता है
धुंआ धुंआ सांसें
उखड़ी उखड़ी चाल
कमबख्त बस बदन टूटता है
मगज कब कहाँ कुछ भूलता है,
मदिरा के नशा ने
पल पल होश दिलाया है
जालिम ज़िन्दगी ने
जब जब तड़पाया है

नशा चाहे कोई भी हो मतवाला बना देता है
जीवन को ढोने के लिए नशीला बना देता है

अच्छी प्रस्तुति ....

anju(anu) choudhary said...

वाह ....सधे शब्दों में सार्थक कविता

जिंदगी को सन्देश देती ....अगर कोई माने तो

Mukesh Kumar Sinha said...

NASHA ACHCHHA LAGA DI:)

रेखा said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति ...

Maheshwari kaneri said...

कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !....बढिया, .बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

kase kahun?by kavita verma said...

sundar abhivyakti...

dinesh aggarwal said...

बेहतरीन रचना, सुन्दर संदेश....
कृपया इसे भी पढ़े-
क्या यही गणतंत्र है