Tuesday, January 26, 2016

503. आज का सच...

आज का सच...

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थोप देते हो    
अपनी हर वो बात     
जो तुम चाहते हो कि मानी जाए   
बिना ना नुकुर  
बिना कोई बहस    
और यह भी चाहते हो कि सभी मान लें    
तुम हमेशा सही हो  
बिलकुल परफेक्ट   
तुम गलत हो ही नहीं सकते    
तुम्हारे सारे समीकरण   
सही हैं   
न भी हों तो कर दिए जाते हैं   
किसका मजाल जो तुम्हें गलत कह सके   
आख़िर  
मिल्कियत तुम्हारी  
हुकूमत तुम्हारी  
हर शै गुलाम  
पंचतत्व तुम्हारे अधीन   
हवा, पानी, मिट्टी, आग, आकाश   
सब तुम्हारी मुट्ठी में  
इतना भ्रम  
इतना अहंकार  
मन करता है   
तुम्हें तुम्हारा सच बताऊँ     
जान न भी बख्शो तो भी  
कह ही दूँ -  
जो है सब झूठ  
बस एक ही सच 
आज का सच  
''जिसकी लाठी उसकी भैंस !''    

- जेन्नी शबनम (26. 1. 2016)

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11 comments:

राकेश कौशिक said...

"फौग" नहीं आजकल "जिसकी लाठी उसकी भैंस" यही चल रहा है, सटीक अभिव्यक्ति

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 28 - 01 - 2016 को चर्चा मंच पर चर्चा -2235 में दिया जाएगा
धन्यवाद

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

सत्यता बयान करती रचना ।

mahendra verma said...

यही आज की वास्तविकता है ।
शुभकामनाएं ।

Anil Sahu said...

बढ़िया रचना :)

Anil Sahu said...

सुंदर.

kuldeep thakur said...


आज पांच लिंकों का आनंद अपना 200 अंकों का सफर पूरा कर चुका है.. इस विशेष प्रस्तुति पर अपनी एक दृष्टि अवश्य डाले....
आपने लिखा...
और हमने पढ़ा...
हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 02/02/2016 को...
पांच लिंकों का आनंद पर लिंक की जा रही है...
आप भी आयीेगा...

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

भावपूर्ण रचना ।

Asha Joglekar said...

कभी कभी सच कह देना ही होता है समीकरण का हल।

Digamber Naswa said...

केवल कडुआ सच लिखा है ... जिसका जोर चलता है उसका राज और वो बस सच ही कहता है ...

i Blogger said...

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