5 क्षणिका लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
5 क्षणिका लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 12 दिसंबर 2024

783. पैरहन (5 क्षणिका)

पैरहन
*** 

1.
लकीर
***

हथेली में सिर्फ़ सुख की लकीरें थीं
कब किसने दुःख की लकीरें उकेर दीं
जो ज़िन्दगी की लकीर से भी लम्बी हो गई
अब उम्मीद की वह पतली डोर भी टूट गई
जिसे सँजोए रखती थी तमाम झंझावतों में
और हथेली की लकीरों में तलाशती थी।

2.

इस पार या उस पार 

*** 


शब्दों का कब तक दूँ हिसाब 

सवालों से घिरी मैं

अब नहीं चाहती जवाब

सिर पर लिए हुए सारे सवालों का धार 

चुपचाप गुम हो जाना चाहती हूँ

संसार के इस पार या उस पार।


  

3.

बेजान 
***

रिश्ते बेजान हुए
कोई चाह अब शेष नहीं
टूटी-फूटी धड़कनें बेहाल हुईं
खण्ड-खण्ड में टूटा दिल, साँसें बेजार हुईं
सपनों के भँवर-जाल की सन्नाटों से बात हुईं
सब छूटा, सब बिखरा, जीने की ख़त्म राह हुई। 


4.
पैरहन
***

मैंने ख़ुद को पहन रखा है सदियों से
ज़िन्दगी पैरहन है, जो अब बोझ लगती है
अब तो बे-आवाज़ ये पैरहन छूटे
मैं बे-लिबास हो जाऊँ
मैं आज़ाद हो जाऊँ।

5.
बदलाव
***

मौसम का बदलना
नियत समय पर होता है
पर मन का मौसम
क्षणभर में बदलता है
यह बदलाव
कोई क्यों नहीं समझता है?

- जेन्नी शबनम (12.12.2024)
_____________________

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

706. कहानियाँ (5 क्षणिका)

कहानियाँ  

*******

1.
कहानी 
***
कहानी में मैं मुझमें ही कहानी   
कहता कौन सुनता कौन   
पन्नों पर रच दी कहानी   
और मैं बन गई इतिहास।

2.
छोटी कहानी
***
छोटे-छोटे लम्हों में   
यादों की ढेरों कतरन हैं   
सबको इकट्ठाकर   
छोटी-छोटी कहानी रचती हूँ   
अकेलेपन में यादों से कहानियाँ निकल   
मेरे चेहरे पे खिल जाती हैं।   

3. 
मेरी कहानी 
***
मेरे युग के प्रारम्भ से   
मेरे युग के अंत तक की   
कथा लिख दी किसी ने   
किसने, यह नहीं मालूम   
न भाषा मालूम न लिखावट   
पर इतना मालूम है 
कहानी मेरी है।

4.
एक कहानी 
***
रात के धागे में हर रोज़   
यादों के मोती पिरोती हूँ   
हर मोती एक कहानी   
हर कहनी मेरी ज़िन्दगी   
अब सब चाँद के लॉकर में   
रख दिया है संजोकर   
जीवन के अमावस में   
ज़रूरत पड़ेगी।   

5. 
असली कहानी 
***
बचपन की कहानी बड़ी निराली   
दो पंक्तियों में पूरी कहानी   
एक था राजा एक थी रानी   
दोनों मर गए ख़तम कहानी   
तब मालूम कहाँ था   
जीने और मरने के बीच बनती है   
जीवन की असली कहानी।   

- जेन्नी शबनम (5. 1. 2021)
____________________

 

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

639. सवाल (5 क्षणिका)

सवाल 

*******   

1. 
कुछ सवाल
***  
कुछ सवाल ठहर जाते हैं मन में 
माकूल जवाब मालूम है 
मगर कहने की हिमाकत नहीं होती 
कुछ सवालों को 
सवाल ही रहने देना उचित है 
जवाब आँधियाँ बन सकती हैं। 

2. 
एक सवाल 
***  
ख़ुद से एक सवाल- 
कौन हूँ मैं? 
क्या एक नाम? 
या कुछ और भी? 

3. 
आख़िरी सवाल 
***  
सवालों का सिलसिला 
तमाम उम्र पीछा करता रहा 
इनमें उलझकर 
मन लहूलुहान हुआ 
पाँव भी छिले चलते-चलते 
आख़िरी साँस ही आख़िरी सवाल होंगे। 

4. 
सवाल समुद्र की लहरें 
***  
कुछ सवाल समुद्र की लहरें हैं 
उठती गिरती तेज़ क़दमों से चलती हैं 
काले नाग-सी फुफकारती हैं 
दिल की धड़कनें बढ़ाती हैं 
मगर कभी रूकती नहीं 
बेहद डराती हैं। 

5. 
सवालों की उम्र 
***  
सवालों की उम्र 
कभी छोटी क्यों नहीं होती?  
क्यों ज़िन्दगी के बराबर होती है?  
जवाब न मिले तो चुपचाप मर क्यों नहीं जाते?  
सवालों को भी ऐसी ही ख़त्म हो जाना चाहिए 
जैसे साँसे थम जाए तो उम्र खत्म होती है। 

- जेन्नी शबनम (2. 12. 2019)   
______________________