Sunday, July 5, 2009

69. 'शब' की मुराद

'शब' की मुराद
[ 'ज़ख्म' फिल्म से प्रेरित नज़्म ]

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'शब' जब 'शव' बन जाए, उसको कुछ वक़्त रहने देना
बेदस्तूर सही, सहर होने तक ठहरने देना !

उम्र गुज़ारी है 'शब' ने अँधेरों में
रौशनी की एक नज़र पड़ने देना !

डरती है बहुत 'शब' आग में जलने से
दुनियावालों, उसे दफ़न करने देना !

मज़हब का सवाल जो उठने लगे तो
सबको वसीयत 'शब' की पढ़ने देना !

ढ़क देना माँग की सिंदूरी लाली को
वजह-ए-वहशत 'शब' को न बनने देना !

जगह नहीं दे मज़हबी जब दफ़नाने को
घर में अपने, 'शब' की कब्र बनने देना !

तमाम ज़िन्दगी बसर हुई तन्हा 'शब' की
जश्न भारी औ मजमा भी लगने देना !

अश्क नहीं फूलों से सजाना 'शब' को
'शब' के मज़ार को कभी न ढ़हने देना !

'शब' की मुराद, पूरी करना मेरे हमदम
'शब' के लिए, कोई मर्सिया न पढ़ने देना !

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शब - रात (एक काल्पनिक नाम)
शव - लाश / मुर्दा
वजह-ए-वहशत - भय / आतंक का कारण
मर्सिया - मृत्यु पर शोकगान
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- जेन्नी शबनम (नवम्बर, 1998)

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4 comments:

kishor kumar khorendra said...

najm me aapne ek sachche vykti ko apne shbdo ke madhyam se prastut kiya hae

bahut sundar

Priya said...

nazm bahut achchi lagi zenny ji.... Infact ye picture bhi bahut achchi thi......Pooja Bhatt ne apne kirdaar ke saath poora nyaaya kiya tha..

Jitin said...

kuch kehne yogya na mere paas shabd hain, na main surya ko diya dikhane ki gustaakhi karna chahta hoon. sirf itna kahunga ki aapke rachna ka marm dil mein bahut gehra utar gaya jenny ji...

Anonymous said...

"lamho ka safar " veryyyyyyyyyyy nice