Tuesday, December 1, 2009

104. राह मुकम्मल करनी है / raah mukammal karni hai

राह मुकम्मल करनी है

*******

साथी छूटे कि राह भूले, ये ज़िन्दगी तो चलनी है
मन हारे कि तन हारे, हर राह मुकम्मल करनी है 

आँखों के सागर में डूबी, प्यासी रूह भटकती मेरी
उससे दूर जिएँ हम कैसे, मगर साँस तो भरनी है 

ज़ख्म दे मरहम लगाता, अजब है उसकी आशनाई
हँस-हँस कर सह लें मगर, दिल मेरा तो छलनी है 

ऐ ख़ुदा उसे बख्श दे, कमी नहीं तेरी हुकूमत में
दरकार तो हमें बुला, ज़िन्दगी यूँ भी कब कटनी है 

वादा किया था उसने, हर जन्म में साथ निभाने का
तोड़ा वादा इस जीवन का, अब ख़्वाहिश भी मरनी है 

लेंगे साथ जन्म दोबारा, फिर दूर कभी न होंगे हम,
इस उम्र की साध सभी, मन में जतन से रखनी है 

तन्हाई से घबड़ा कर, पनाह माँगती 'शब' ख़ुदा से
शब की फितरत, हर शब को तन्हा-तन्हा जलनी है 

- जेन्नी शबनम (दिसंबर 1, 2009)

______________________________________________

raah mukammal karni hai

*******

saathi chhute ki raah bhoole, ye zindagi to chalni hai
man haare ki tan haare, har raah mukammal karni hai.

aankhon ke saagar mein doobi, pyaasi rooh bhatakti meri
usase door jiyen hum kaise, magar saans to bharni hai.

zakham de marham lagaata, ajab hai uski aashnaai
huns huns kar sah lein magar, dil mera to chhalni hai.

ae khuda use bakhsh de, kami nahin teri hukumat mein
darkaar to hamein bulaa, zindagi yun bhi kab katni hai.

waadaa kiya thaa usne, har janm mein saath nibhaane ka
todaa waadaa is jiwan ka, ab khwaahish bhi marni hai.

lenge saath janm dobaaraa, fir door kabhi na honge hum
is umrr ki saadh sabhi, man mein jatan se rakhni hai.

tanhaai se ghabra kar, panaah maangti 'shab' khuda se
shab ki fitrat, har shab ko tanha-tanha jalni hai.

 - Jenny Shabnam (December 1, 2009)

___________________________________________________

2 comments:

रश्मि प्रभा... said...

आँखों के सागर में डूबी, प्यासी रूह भटकती मेरी,
उससे दूर जियें हम कैसे, मगर सांस तो भरनी है !
.....kya ehsaas hain

jenny shabnam said...

रश्मि जी,
कुछ एहसास ऐसे होते जिन्हें बस शब्दों में हीं उतार सकते, ज़िन्दगी में नहीं ढाल सकते| यहाँ आने और मुझे समझने केलिए धन्यवाद!