Monday, March 29, 2010

130. निशानी... / nishaani...

निशानी...

*******

वक़्त के सीने पर
हम अपनी कहानी लिख जाएँगे
किसी की यादों में
हम अपनी निशानी छोड़ जाएँगे
याद करोगे तो होठों की
ख़ामोश हँसी में लिपट जाएँगे
कभी आँखों से
बूँद बन बरस जाएँगे
कभी सपनों में कभी ख्यालों में
आ तड़पा जाएँगे
न चाहो फिर भी
हम तन्हाइयों में आ जाएँगे
भूल न जाओ कहीं
हम लहू बन नस-नस में समा जाएँगे
मेरी निशानी ढूँढ़े जो कोई
तुम्हारी आँखों में हम दिख जाएँगे !

- जेन्नी शबनम (जुलाई 21, 2007)

___________________________________

nishaani...

*******

waqt ke seene par
hum apni kahaani likh jaayenge
kisi ki yaadon mein
hum apni nishaani chhod jaayenge
yaad karoge to hothon ki
khaamosh hansi mein lipat jaayeng
kabhi aankhon se
boond ban baras jaayenge
kabhi sapnon mein kabhi khayaalon mein
aa tadpaa jaayenge
na chaaho fir bhi
hum tanhaaiyon mein aa jaayenge
bhool na jaao kahin
hum lahoo ban nun-nus mein sama jaayenge
meri nishaani dhundhe jo koi
tumhaari aankhon mein hum dikh jaayenge.

- Jenny Shabnam (July 21, 2007)

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11 comments:

संजय भास्कर said...

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

kishor kumar khorendra said...

bahut sundar kavita

रश्मि प्रभा... said...

ise hi to pyaar kahte hain
dil pe chhalkte hue ehsaas kahte hain,
bahut hi badhiya jenny ji

आशीष/ ASHISH said...

Hothon par hansi, aankhon mein nami....
Kya ajab ahsaas hota hai kisi ki yaadon ka!
Sadhuwad!

jenny shabnam said...

kishor ji ne apni pratikriya mere scrap par dee aur unki sahmati se yaha punah preshit...

Mar 29 (2 days ago)
kishor kumar:
निशानी...

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वक़्त के सीने पर
हम अपनी कहानी लिख जायेंगे,
किसी की यादों में
हम अपनी निशानी छोड़ जायेंगे,
याद करोगे तो होठों की
ख़ामोश हँसी में लिपट जायेंगे,
कभी आँखों से
बूँद बन बरस जायेंगे,
कभी सपनों में कभी ख्यालों में
आ तड़पा जायेंगे,
न चाहो फिर भी
हम तन्हाइयों में आ जायेंगे,
भूल न जाओ कहीं
हम लहू बन नस-नस में तुम्हारी समा जायेंगे,
मेरी निशानी ढूंढें जो कोई
तुम्हारी आँखों में हम दिख जायेंगे !

__ जेन्नी शबनम __ २१.०७.२००७

1-कहानी
२-निशानी
३-सबके ओंठो की खामोशी
४-आँखों से बूंद बन ..
५-स्वप्न तो कभी ख्याल बन जायेंगे
६-तन्हाई में तन्हाई बन कर आ जायेंगे
७-आँखों में रक्तिम आभा बन
तुम्हारी आँखों में ही दिख जायेंगे

कविता पढ़ना भी तो कविता लिखना ही हैं न ..जेन्नी

सुन्दर कविता तो हैं हीं
यह निशानी अमिट हैं

जेन्नी के पास हैं जीवन का एक अर्थ
उसे ही करना चाहती हैं वह अभिव्यक्त

लेकिन प्रेम की उस शाश्वत
और व्यापक अनुभूती की
अनुगूँज को ...
लिखने में .... शब्दों के अर्थ भी
हो जाते हैं असमर्थ

लिखती रहें ..हालाकि ..शब्दों से परे हैं प्रेम का अर्थ
पर साहित्य का काम उसे प्रत्यक्ष करने का एक प्रयास ही तो हैं

बस ऐसे ही आपकी कविताओ कों पढ़ कर लिख गया

किशोर

अर्चना गंगवार said...

याद करोगे तो होठों की
ख़ामोश हँसी में लिपट जायेंगे,

waaaaaaaaaaah ....
kya baat hai....
kuch na deker bhi bahut kuch de jata hai vo.....jiski sirf yaad hi hontho ko ek muskerahat de jaye....
maza aa gaya

jenny shabnam said...

संजय भास्कर ने कहा…
किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।
बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।
_________________

sanjay ji,
hausla badhaane keliye man se shukriya aapka.

jenny shabnam said...

रश्मि प्रभा... ने कहा…
ise hi to pyaar kahte hain
dil pe chhalkte hue ehsaas kahte hain,
bahut hi badhiya jenny ji
___________________

rashmi ji,
rachna ki sarahna keliye bahut shukriya aapka.

jenny shabnam said...

आशीष/ ASHISH ने कहा…
Hothon par hansi, aankhon mein nami....
Kya ajab ahsaas hota hai kisi ki yaadon ka!
Sadhuwad!
_______________________

aashish ji,
meri rachna ko mahsoos kiya aapne man se aabhar aapka.

jenny shabnam said...

kishor kumar khorendra ने कहा…
bahut sundar kavita
kishor kumar:
निशानी...

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वक़्त के सीने पर
हम अपनी कहानी लिख जायेंगे,
किसी की यादों में
हम अपनी निशानी छोड़ जायेंगे,
याद करोगे तो होठों की
ख़ामोश हँसी में लिपट जायेंगे,
कभी आँखों से
बूँद बन बरस जायेंगे,
कभी सपनों में कभी ख्यालों में
आ तड़पा जायेंगे,
न चाहो फिर भी
हम तन्हाइयों में आ जायेंगे,
भूल न जाओ कहीं
हम लहू बन नस-नस में तुम्हारी समा जायेंगे,
मेरी निशानी ढूंढें जो कोई
तुम्हारी आँखों में हम दिख जायेंगे !

__ जेन्नी शबनम __ २१.०७.२००७

1-कहानी
२-निशानी
३-सबके ओंठो की खामोशी
४-आँखों से बूंद बन ..
५-स्वप्न तो कभी ख्याल बन जायेंगे
६-तन्हाई में तन्हाई बन कर आ जायेंगे
७-आँखों में रक्तिम आभा बन
तुम्हारी आँखों में ही दिख जायेंगे

कविता पढ़ना भी तो कविता लिखना ही हैं न ..जेन्नी

सुन्दर कविता तो हैं हीं
यह निशानी अमिट हैं

जेन्नी के पास हैं जीवन का एक अर्थ
उसे ही करना चाहती हैं वह अभिव्यक्त

लेकिन प्रेम की उस शाश्वत
और व्यापक अनुभूती की
अनुगूँज को ...
लिखने में .... शब्दों के अर्थ भी
हो जाते हैं असमर्थ

लिखती रहें ..हालाकि ..शब्दों से परे हैं प्रेम का अर्थ
पर साहित्य का काम उसे प्रत्यक्ष करने का एक प्रयास ही तो हैं

बस ऐसे ही आपकी कविताओ कों पढ़ कर लिख गया

किशोर
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kishor ji,
meri rachna ko itna sneh aap dete hain, likhne ka hausla badhta hai. kaisa likhti ye to nahin janti, par jo bhi man mein janm leta shabdon mein utar deti hun. yun hin apna sneh banaye rakhen mujhpar. bahut shukriya aapka.